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You are at:Home » CHAPTER 11 | PART 2 | INTRODUCTION | GOVERNMENT BUDGET AND TAXATION | THE STUDY STATION
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CHAPTER 11 | PART 2 | INTRODUCTION | GOVERNMENT BUDGET AND TAXATION | THE STUDY STATION

adminBy adminMarch 23, 2024No Comments6 Mins Read
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हेलो एवरीवन एंड वेलकम बैक टू द चैनल तो आज हम 11थ चैप्टर की पार्ट टू यानी कि आखिरी वीडियो करने वाले हैं तो इसका पहला टॉपिक है जीएसटी गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स अगर आपको इसका पिछला पार्ट देखना है तो यहां पर आप आई बटन पर क्लिक कर सकते

हैं जीएसटी इंडिया में 2017 में लॉन्च हुआ था लेकिन जीएसटी के इंडिया में आने से पहले कई सारे इनडायरेक्ट टैक्सेस हुआ करते थे जैसे कि सेल्स टैक्स सर्विसेस टैक्स इनवॉइस ड्यूटी एक्सेट्रा लेकिन जीएसटी के आने के बाद उसने इन सारे टैक्सेस को रिप्लेस कर दिया प्रोडक्शन और सेलिंग के

बीच में कई सारे अलग-अलग स्टेजेस होते हैं जिसके बाद कई सारे स्टेजेस में बीच में जीएसटी लगाया जाता है इसे एक एग्जांपल से समझते हैं अगर एक बिस्किट मैन्युफैक्चरर बिस्किट्स बनाने के लिए रॉ मटेरियल खरीदता है जैसे कि फ्लोर शुगर एक्सेट्रा तो उस पर उसे कोई भी चार्जेस यानी कि टैक्स नहीं

लगता लेकिन एक बार इन्हीं रॉ मटेरियल से जब बिस्किट्स बनकर यानी कि एक फिनिश्ड प्रोडक्ट बनकर तैयार हो जाता है इसके बाद अगर बिस्किट्स का टोटल प्राइस मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट 450 भी हुआ इंक्लूडिंग वेजेस सैलरीज ऑफिस या फिर रेंट वगैरह सब मिलाकर भी तो भी अ मैन्युफैक्चरर

इस पर अपना ₹ प्रॉफिट मार्जिन रखकर बेचता है जो कि ट्रेडर को ₹5000000 पर % जीएसटी लगने के बाद प्लस ₹2500000 ट्रेडर पर चार्ज किए जाते हैं तो ट्रेडर को टोटली यह पैकेट मिलता है ₹ 25 में यह पैसे ट्रेडर मैन्युफैक्चरर को देता है

जिसकी मदद से वह अपना टैक्स पे करता है अब ट्रेडर इसी सेम बिस्किट पैकेट को लेकर अपनी शॉप में आता है उसे स्टोर करता है उसके लिए स्टाफ हायर करता है अपने सारे प्रॉफिट मार्जिन रखते हुए यह सेम बिस्किट पैकेट को 00 में आगे रिटेलर को बेचेगा अब

इन्हीं 00 पर फिर से 5 पर जीएसटी टैक्स लग जाएगा इसके बाद टैक्स लगने के बाद यह हो जाता है ₹ 30 अब यह ₹ 30 रिटेलर को ट्रेडर को पे करना पड़ेगा अगर हम याद करें तो ट्रेडर ने इसे मैन्युफैक्चरर से परचेस करने के टाइम पर ऑलरेडी

₹2500000 इस बिस्किट पैकेट को ₹1000000 जीएसटी के साथ इसके बाद अपनी प्रॉफिट मार्जिन रखते हुए रिटेलर इसी सेम 630 वाले बिस्किट पैकेट को 700 में फाइनली कंज्यूमर को बेचेगा प्लस इसके ऊपर फिर से % जीएसटी टैक्स लग जाएगा जो कि इस बार होता है ₹ 335 अब इन ₹5000000

तो रिटेलर ने भी ट्रेडर को ₹10 अपना जीएसटी टैक्स ऑलरेडी पे कर दिया था तो इस बार गवर्नमेंट को एज ए टैक्स यह सिर्फ ₹ पे करेगा अब इसी के सब टॉपिक पर आते हैं जो कि है इंपैक्ट ऑफ जीएसटी यहां पर सिर्फ तीन पॉइंट सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है पहला

पॉइंट यह है कि बिल्स जीएसटी में एक इंपॉर्टेंट रोल प्ले करते हैं बिल्स को आप एज अ प्रूफ बता सकते हैं कि आपने अपना प टैक्स पे किया है या फिर नहीं पिछली सिचुएशन में अगर हम देखें तो अगर ट्रेडर के पास मैन्युफैक्चरर से दिया हुआ प्रॉपर

बिल नहीं है तो ट्रेडर को दोबारा से ₹ 3030 टैक्स फिर से पे करना पड़ेगा क्योंकि उसके पास प्रूफ नहीं है सेम गोज टू रिटेलर कंज्यूमर यहां पर बिल्स देख दिखाना इसीलिए इंपॉर्टेंट है ताकि टैक्स किसी से भी अवॉइड ना हो सेकंड पॉइंट है कि चाहे वोह मैन्युफैक्चरर हो या फिर ट्रेडर सबसे

ज्यादा टैक्स पेमेंट तो कंज्यूमर को ही करना पड़ता है कई बार लोगों को पता भी नहीं होता कि वोह लोग इस पर्टिकुलर प्रोडक्ट पर टैक्स भी पे कर रहे हैं अब फा फनल टैक्स का बर्डन जो है कंज्यूमर पर ही पड़ता है थर्ड पॉइंट है जीएसटी का सबसे

इंपॉर्टेंट फीचर है वन टैक्स फॉर होल कंट्री यानी कि कंट्री में आप कहीं भी हो पर्टिकुलर प्रोडक्ट का टैक्स रेट बिल्कुल ही सेम होगा जीएसटी के आने से पहले ऐसा बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि स्टेट टू स्टेट चाहे वो मेडिसिंस हो या फिर मोटरसाइकिल इन पर अलग-अलग चार्जेस लगाए

जाते थे टैक्स के लेकिन जीएसटी आने के बाद यह सब कुछ चेंज हो गया जीएसटी के चार्जेस अलग-अलग परसेंटेज के हिसाब से लगाए जाते हैं जैसे कि कि 5 पर 12 18 पर और 28 हमारा अगला टॉपिक है फेयरनेस इन टैक्सेशन कई सारे लोगों को लगता है कि

गवर्नमेंट का टैक्स कलेक्ट करने का मेथड बिल्कुल भी सही नहीं है उन्हें ऐसा लगता है कि रिच पीपल को सबसे ज्यादा टैक्स पे करना चाहिए और पूर पीपल को मिनिमम टैक्स पे करना चाहिए और इन सारे टैक्स को कलेक्ट करके पूर पीपल के लिए बेटर अपॉर्चुनिटी और

लिविंग मेथड्स लिविंग कंड क्रिएट किए जा सकते हैं इनकम टैक्स के रूल्स के मुताबिक जिसकी इनकम ज्यादा होती है वह ज्यादा टैक्स पे करता है और जिसकी इनकम कम होती है उसे कम टैक्स पे करना पड़ता है और लेकिन गुड्स और सर्विसेस को के ऊपर टैक्स

इंप्लीमेंट करने के लिए पूर और रिच पीपल में डिफरेंशिएबल राइस ग्रेंस वीट कुकिंग ऑयल गैस एक्सेट्रा यह सारी चीजें उन पर कम टैक्स लगता है क्योंकि पूर पीपल की आधी से ज्यादा इनकम तो इन चीजों को परचेस करने में ही लग जाती है लेकिन कुछ लग्जरी आइटम्स भी होते हैं

जिसे सिर्फ रिच पीपल ही अफोर्ड कर पाते हैं फॉर एग्जांपल कार लैपटॉप्स एसी एक्सट्रा इन पर ज्यादा टैक्स लगता है तो गवर्नमेंट ने रिच और पूर के बीच में डिफरेंशिएबल जरी आइटम्स पर ज्यादा टैक्स लगता है तो हमारा आज का लास्ट टॉपिक है कलेक्शन एंड इवेज ऑफ टैक्सेस गवर्नमेंट को टैक्सेस

अलग-अलग काइंड के टैक्सेस से पैसा मिलता है और गवर्नमेंट को यह पता करना जरूरी है कि ईच काइंड ऑफ टैक्स से कितना पैसा आ रहा है इसके लिए यह भी जानना जरूरी है कि उस पर्टिकुलर काइंड ऑफ टैक्स से कितने सारे लोग पैसे पे कर रहे हैं या फिर कितने सारे

लोग उस टैक्स को अवॉइड कर रहे हैं कंट्री में लार्ज नंबर ऑफ पीपल एग्रीकल्चर पर डिपेंड है कई सारे स्मॉल फार्मर्स और मीडियम फार्मर्स होते हैं जो कि टैक्स पे नहीं कर पाते और कई सारे बड़े फार्मर्स भी होते हैं जिनकी इनकम अच्छी खासी होती है

लेकिन एग्रीकल्चर से आया हुआ कोई भी पैसा टैक्स के लिए नहीं दिया जा सकता इसीलिए टैक्स पे करने वाले लोगों की परसेंटेज काफी कम है इसमें से भी कई सारे लोग अपनी इनकम को लैंड से आने वाली बताते हैं ताकि वो लोग इसके टैक्स से बच जाए और कई सारे

लोग जो है अलग-अलग बिजनेसेस तो करते हैं लेकिन गवर्नमेंट से अपनी इनकम हाइड करते हैं ताकि वह उस टैक्स से बच जाए इस हाइड की हुई इनकम को ब्लैक मनी कहते हैं कई सारे जो मैन्युफैक्चरर्स होते हैं अपनी लोअर सेल्स बताते हैं ताकि वह लोग भी

टैक्स से बच जाएं इसी की वजह से ज्यादातर इवेज ऑफ टैक्सेस होते हैं तो आज का हमारा 11थ चैप्टर यहीं पर खत्म होता है मिलते हैं आप लोगों से नेक्स्ट वीडियो में तब तक के लिए बाय

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