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Brotherhood

what is Preamble? |polity| Laxmikant ✨ marathon #upsc #india #ias #ips

adminBy adminFebruary 2, 2024No Comments11 Mins Read
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हेलो जी आज का टॉपिक है हमारा प्रिंबल प्रिंबल बेसिकली एक समरी होती है हमारी जो कॉन्स्टिट्यूशन की बुक है उसके अंदर पमल इज द एेंस ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन प्रिंबल को जो है आइडेंट कार ऑफ द कांस्टिट्यूशन भी बोला जाता है और प्रिंबल के अंदर कुछ वर्ड्स जो है 42 कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट

1976 में सोशलिस्ट सेकुलर इंटीग्रिटी वर्ड इसके अंदर मेंशन बाद में हुए थे वी द पीपल ऑफ द इंडिया हैव सो रिजॉल्व टू कांस्टीट्यूट इंडिया इनटू द सोवन सोशलिस्ट सेकुलर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक एंड टू सिक्योर ल इट सिटीजंस जस्टिस सोशल इकोनॉमिक एंड द पॉलिटिकल लिबर्टीज ऑ थॉट एक्सप्रेशन बिलीव फेथ एंड द वशिप इक्वलिटी

ऑफ द स्टेटस ऑफ द अपॉर्चुनिटी एंड टू प्रमोट अमंग देम ल फ्रेटरनिटी एश्योरिंग द डिग्निटी ऑफ द इंडिविजुअल एंड द यूनिटी एंड द इंटीग्रिटी ऑफ द नेशन इट आवर कंटेंट असेंबली दे 26 डे ऑफ नवंबर 1946 टू हिर बाय अडॉप्ट द गिवर द कांस्टिट्यूशन हमारा कांस्टिट्यूशन जो है वो एक इंडिया जो है

इसके अंदर हर एक पॉइंट के हर एक पॉइंट के एक मीनिंग है और उनका ब्रीफ डिस्क्राइब किया गया है ठीक है तो हम इंडिया एक इंडिपेंडेंट नेशन है इसीलिए हमने अपने इसको जो इंग्रेडिएंट्स ऑफ अथॉरिटी ऑफ कांस्टिट्यूशन नेचर ऑफ इ इंडियन स्ट ऑब्जेक्ट ऑफ द कंस्टीटूशन डेट

ऑफ एडॉप्शन ऑफ कॉन्स्टिट्यूशन ये सारा का सारा हमारे प्रिंबल के अंदर मेंशन है ठीक है हर एक वर्ड जो प्रिंबल में लिखा हुआ है उसके एक मीनिंग है वो मैटर करता है पहला वर्ड है सोवन सोवन ट इज नाइ दर अ डिपेंडेंस नॉर अ डोमिनेट ऑफ एनी नेशन बट

एन इंडिपेंडेंट से सोवन से यहां मतलब है कि हम भारत जो है वो एक सोवन संप्रत देश है जो कि किसी और दूसरे की अथॉरिटी उसके ऊपर नहीं चलेगी चाहे इंटरनल हो चाहे एक्सटर्नल हो अपने अफेयर्स हम फ्रीली कंडक्ट करते हैं अपनी मर्जी से कंडक्ट

करते हैं चाहे वो टेरिटरी का मैटर हो चाहे वो इंटरनेशनल लेवल प अपनी बात रखने का मैटर हो कोई भी मैटर हो हम जो है वो अपने मुद्दों पे खुद ही इवॉल्व होते हैं नेक्स्ट पॉइंट है हमारा सोशलिस्ट सोशलिस्ट से हमारा मतलब है कि इंप्ला द इंडिया इज नादर

डिपेंडेंसी और दैट द सोशलिस्ट वर्ड जो है 42 अमेंडमेंट 1976 में ऐड किया गया था और सोशलिस्ट जो है वो वर्ड बताता है कि सोशलिस्ट वर्ड जो है यहां ही नहीं एक डीपीएसपी में भी मेंशन किया गया था सोशलिस्ट से हमारा मतलब है कि हमारा देश जो है ना तो अ

फुली एक इकॉनमी बेस्ड होता है ना तो कैपिट की तरफ जाएगा ना उसकी तरफ हमारा देश जो है सोशलिज्म को फॉलो करता है कैपिट प्लस मूव टुवर्ड द प्राइवेटाइजेशन जिसमें नई इकोनॉमिक पॉलिसी 1991 ऑफ द लिबर एंड प्राइवेटाइजेशन दोनों की दोनों साथ में को एक्जिस्ट करती है हमारे देश में

डेमोक्रेटिक सोशलिज्म एम्स टू एंड पॉवर्टी इग्नोर डिजीज इनिक्वालिटी ऑफ द अपॉर्चुनिटी देन उसके बाद है सेकुलर सेकुलर से मतलब है और हां सोशलिस्ट का मतलब है कि जो भी सारे काम हो रहे होंगे वो वेलफेयर स्टेट स्टेट का भला करने के लिए स्टेट के वेलफेयर के लिए होंगे

इसीलिए जो है वो हमारी जो इकोनॉमिक पॉलिसी वगैरह है वो स सी मिक्स्ड इकॉनमी पे हमारा ज्यादा ध्यान होता है कि इकॉनमी जो है वो हमारी मिक्सड होके चले ना तो पूरी तरह कैपिटल हो ना ही पूरी तरह से वैसे हो इसलिए हम लोगों का ध्यान रखते हुए

डेमोक्रेटिक सोशलिज्म को फॉलो करते हैं उसके बाद आता है जैसे इशू ऑफ एलपीजी रिफॉर्म 1991 ये वाले इशू भी है इसमें एग्जांपल के तौर पे नेक्स्ट है सेकुलरिज्म सेकुलरिज्म से हमारा मतलब सर्व धव संभव यानी कि हमारे देश के अंदर हर एक धर्म को इक्वली ट्रीट किया जाएगा ऑल रिलीजस

ट्रीटेड इक्वली सेकुलर वर्ल्ड भी हमारा 42 कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट एक्ट 197 76 में आया था 42 कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट एक् 1976 में चार वर्ड ऐड किए गए थे सोशलिस्ट सेकुलर एंड इंटीग्रिटी तो इसमें सेकुलर में हमारे सभी धर्मों को इक्वली मान्यता दी जानी चाहिए और यह फंडामेंटल राइट में भी हमारे

आर्टिकल 25 से 28 में भी बताया गया है कि हर एक धर्म की क्या वैल्यू है और हर एक धर्म को फॉलो करने का लोगों की खुद की मन की इच्छा है कि वो कौन सा धर्म फॉलो करना चाह रहा है उसके बाद में डिफरेंट डिफरेंट स्टेट में सेकुलरिज्म अलग-अलग प्रकार का

पाया जाता है एथ स्टेट होती है स्टेट होती है और सेकुलर स्टेट होती है एथ स्टेट वो होती है जो कि धर्म के खिलाफ होती है नॉन रिलीजियस होंगी जैसे कि इसका नॉन रिलीजियस का एग्जांपल है फ्रांस वगैरह फ्रांस में जो देश है वो नॉन रिलीजियस है उसके बाद है

थियोक्रेटिक स्टेट थियोक्रेटिक स्टेट वो होती है जो प्रो रिलीजन हो कि वहां पे धर्म की ही चलेगी ब्रॉड लेवल पे भी जैसे पाकिस्तान हो गया श्रीलंका हो गया बर्मा हो गया बांग्लादेश हो गया थर्ड आता है हमारा सेकुलर स्टेट वो स्टेट जो कि न्यूट्रल होगा धर्म के मामले में कोई भी

किसी भी धर्म के काम के बीच में बीच में टांग नहीं हड़ आएगा अनलेस अं अनलेस जब तक कि बहुत ज्यादा जरूरी नहीं हो तब तक यूएसए और इंडिया इसका एग्जांपल है देन आता है डेमोक्रेट डेमोक्रेटिक का मतलब है लोकतंत्र डॉक्ट्रिन ऑफ पॉपुलर सॉवरेन डेमोक्रेसी दो तरीके की होती है डायरेक्ट

डेमोक्रेसी और इनडायरेक्ट डेमोक्रेसी डायरेक्ट डेमोक्रेसी जो है डेमोक्रेसी यानी कि लोगों के पास पावर है डायरेक्ट चुनने की डायरेक्ट डेमोक्रेसी जो है वो एक तो एंस टाइम में एथेंस में थी और उसके बाद में अभी करंट का एग्जांपल है स्विट्जरलैंड ठीक है डायरेक्ट डेमोक्रेसी होना और वोटिंग होना डायरेक्ट अपने उसको चुनना

हमारी देश में पॉसिबल नहीं क्योंकि इंडिया की इतनी वास्टप है तो इसलिए डायरेक्ट डेमोक्रेसी उन देशों में होती है जहां पॉपुलेशन बहुत छोटी होती है जैसे कि स्विट्जरलैंड ठीक है उसके बाद हमारा इनडायरेक्ट डेमोक्रेसी के कुछ टाइप्स है पहला रेफरेंडम इनिशिएटिव रिकॉल प्लेब साइड रिफ्रेंड में एक प्रोसीजर है वेयर बाय द

प्रपोज लेजिस्लेटिव इज रेफर टू द इलेक्ट ड फॉर सेटलमेंट बाय द डायरेक्ट वड यानी कि रेफरेंट हो रहा है कि कोई भी लेजिस्लेटिव में एक प्रपोजल प्रपोज किया गया और उसके बाद में डायरेक्ट व से सेटलमेंट होगा कि कौन जीता और कौन नहीं जीता इनिशिएटिव इज अ

मेथड बाय व्हिच मींस ऑफ द पीपल कैन प्रपोज अ बिल इन लेजिस्लेटिव एंड एनेक्टमेंट उसके बाद रिकॉल रिकॉल में क्या होता है रिकॉल में हां रिकॉल में क्या होता है कि द मेथड बाय मींस ऑफ द विच द वोटर्स कैन रिमूव अ रिप्रेजेंटेटिव ऑफ ऑफिसर बिफोर एन एक्सपायरी ऑफ डम यानी कि

अगर हमें किसी भी मिनिस्टर वगैरह को उनकी पोजीशन से हटाना है तो हम रिकॉल डाल सकते हैं उनके टर्म एक्सपायर होने से पहले हम उनको निकाल सकते हैं देन आता है प्लेब साइड प्लेब साइड इज अ मेथड ऑफ ऑब्टेनिंग द ओपिनियन इंडिया ऑफ द पीपल ऑफ एनी इशू ऑफ द पब्लिक

इंपोर्टेंस प्लेब साइड का जो मेथड है वो यूज किया जाता है जब जब हमें जनता के ओपिनियन लेने हो किसी भी टॉपिक से रिलेटेड जनरली इसको यूज किया जाता है टेरिटोरियल डिस्प्यूट डिस्प्यूट्स को सॉल्व करने के लिए उसके बाद है इनडायरेक्ट डेमोक्रेसी पार्लियामेंट एग्जांपल है इसका प्रेसिडेंशियल एग्जांपल है इसका यूएसए य

में साइन ऑफ डेमोक्रेसी इन इंडिया इंडिया में क्या डेमोक्रेसी है यूनिवर्सल फ्रेंचाइजी इलेक्शन होते है रूल ऑफ लॉ है इंडिपेंडेंस ऑफ द जुडिशरी है अगर ये सारे पॉइंट्स है तो इंडिया में डेमोक्रेसी हां हां इंडिया में डेमोक्रेसी है उसके बाद में आता है रिपब्लिक रिपब्लिक दो तरीके का

होता है मोनार्की पहले होता था अब रिपब्लिक रिपब्लिक का मतलब कि मोनार्की इज अ हेड ऑफ द स्टेट एक हेड होगा स्टेट का और रिपब्लिक में क्या होता है कि जो हेड होता है वो डायरेक्टली और इनडायरेक्टली चुना हुआ होना चाहिए लोगों के द्वारा जो आपका

हेड है वो आप ही के द्वारा चुना हुआ है इसलिए उसको हम रिपब्लिक बोलते हैं उसके बाद आ जाता है जस्टिस जस्टिस का मतलब है हमारे प्रिंबल में नेक्स्ट वर्ड है जस्टिस जस्टिस यानी कि हर किसी को न्याय मिलना चाहिए और न्याय जो है वो हर एक लेवल पे

होगा जस्टिस इज फेयरनेस इन द वे द पीपल आर ट्रीटेड हर एक इंसान को इक्वलिटी से ट्रीट करना चाहिए तब न आय लिबर्टी अब होगी उनके पास में उसके बा जस्टिस जो है वो तीन तरीके के होते हैं यूटिलिटेरियन जस्टिस डिस्ट्रीब्यूटर जस्टिस एंड द लास्ट रिट्रीब्यूटिव और रेस्टो रेट्रो रेट

जस्टिस तो यूटिलिटेरियन जस्टिस जो है वो जर्मी बंथम और जे एस मिल्स इंस्पायर है इसमें क्या होता है कि जो मेजोरिटी को देखा जाता है अगर मेजोरिटी हैप्पी है तो फाइन है तो यानी कि मैक्सिमम हैप्पीनेस वाला कांसेप्ट यहां पे फॉलो होता है उसके बाद डिस्ट्रीब्यूटर जस्टिस डिस्ट्रीब्यूटर

जस्टिस में देखा जाता है कि समाज में कैसे गुड्स और कैसे लोगों का लोगों ज्यादा से ज्यादा लोगों तक बेनिफिट्स पनाया जा रहा है बर्डन को कम किया जा रहा है समाज में और एक प्रोपोर्शन में बांट दिया जाता है और न आय जो है वो इक्वली होना चाहिए

पॉलिटिकल जस्टिस होता है ऑल सिटीजन हैव इक्वल पॉलिटिकल राइट एंड इक्वल व वॉइस इन गवर्नमेंट इसका एग्जांपल है ये उसके बाद आता है रेट ब्यूट जस्टिस रेट ब्यूटियस क्या है कि ट्रिब्यूट जस्टिस क्या है कि हमारा हमारा पूरा का पूरा ध्यान होता है जस्टिस पे फोकस ऑन पनिशमेंट ऑफ़ द ऑफेंडर

नॉट ऑन द रिहैबिलिटेशन कुछ जगहों पे क्या होता है कि अगर किसी इंसान ने कोई काम किया है तो पूरी तरह से उसकी पनिशमेंट पे फोकस होता है ना कि उसे रिहैब करने के अगर किसी ने कुछ गलत किया है तो तो उसकी पनिशमेंट मिलेगी लेकिन इंडिया में क्या

होता है रिस्टोर रिस्टोर इव जस्टिस फॉलो की जाती है कि रिहाब किया जाता है कि अगर इंसान ने कुछ गलत किया है तो उसे सुधारने की कोशिश की जाती है उसे ऑफेंडर बैक इन टू द सोसाइटी एंड फोकसिंग इन द विक्टिम ऑफ द अगर उसने कोई भी क्राइम किया है तो उसे

सोसाइटल नॉर्म्स लॉ सिखाए जाते है रिहाब कराया जाता है और उसे समाज में दोबारा इज्जत के साथ लेके आने की कोशिश की जाती है लिबर्टी लिबर्टी क्या है कि अपॉर्चुनिटी टू डेवलप वनसेल्फ फुली खुद को अच्छे से डेवलप करने की आजादी होनी चाहिए अपने राइट टू स्पीच अपने थॉट एक्सप्रेशन

बिलीफ फेथ वशिप हर एक अगर उसे आजादी है अपनी हर चीज करने की तो उसे हम लिबर्टी कहते हैं उसके बाद आता है इक्वलिटी इक्वलिटी में आता है द मींस ऑफ द द मींस ऑफ स्पेशल प्रिविलेज टू एनी सेक्शन की समाज में किसी को भी ऐसा स्पेशल प्रिविलेज नहीं दिया

जाएगा और ना ही कोई ऐसी अपॉर्चुनिटी दी जाएंगी सबको इक्वली ट्रीट किया जाएगा आर्टिकल 14 15 16 17 18 325 326 एक् ये सब जो है एग्जांपल हमारे इक्वलिटी के ल इंडिविजुअल विदाउट एनी डिस्क्रिमिनेशन ट्रीटेड इन द हमारी सोसाइटी उसके बाद आता है फ्रेटरनिटी वर्ड जो है वो भीमराव अंबेडकर जी का सबसे

फेवरेट था जो कि उन्होंने कांस्टिट्यूशन में डलवाया गया था कि ब्रदरहुड भाईचारे की भावना होनी चाहिए सिस्टम के अंदर द प्रिंबल डिक्लेयर द फ्रेटरनिटी हैज टू अशोर टू थिंग्स डिग्निटी ऑफ द इंडिविजुअल एंड यूनिटी ऑफ द इंटीग्रिटी ऑफ द नेशन जब तक भाईचारा है तब तक य नेशन के अंदर जो

यूनिटी बनी रहेगी और इंटीग्रिटी बनी रहेगी लास्ट वा इंटीग्र द वर्ड इंटीग्रिटी हैज बीन एडे टू द प्रीमल ऑफ आयद 42 कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट 1976 यूनिटी इंड इंटीग्रिटी ऑफ नेशन अ प्रीमल की सिग्निफिकेंट क्या है प्रिंबल जो है वो बेसिकली बेसिक फिलोसोफी है फंडामेंटल वैल्यूज बताते है पॉलिटिकल

मोरल एंड रिलीजस ऑन विच द कांस्टिट्यूशन जिसके बार हमारा कॉन्स्टिट्यूशन आधारित हमारा कांस्टिट्यूशन आधारित है पॉलिटिकल मोरल रीजस वैल्यूज के ऊपर इसके सर अलादी कृष्ण स्वामी अयर ने बोला है कि जो हमारे सारे के सारे ड्रीमर्स और एस्पिरेशन फाउंडिंग फादर्स उन्होंने कांस्टिट्यूशन बनाया उन्होंने प्रिंबल को बनाने में लंबा

समय लिया है लेकिन उसको इतने अच्छे से बनाया है कि हमारे आने वाली पीढिया को कोई प्रॉब्लम्स ना हो अकॉर्डिंग टू केमन स प्रिंबल इज द होरोस्कोप ऑफ आवर सोवन डेमोक्रेटिक रिपब्लिक केम मुनस के अकॉर्डिंग प्रीमल जो है होरोस्कोप है हमारे सोवन डेमोक्रेटिक रिपब्लिक देश का

पंडित ठाकुरदास ने बोला है कि प्रिंबल जो है वो समप है फॉलोइंग जो भी वर्ड है कांस्टिट्यूशन में प्रीस पार्ट जो है उनका एक समप बना दिया गया सोल ऑफ द कांस्टिट्यूशन है ये बोला है पंडित ठाकुर दास भार्गव ने बोला है कि प्रिंबल जो है सोल है कांस्टिट्यूशन

की फिर उसके बाद अर्नेस्ट बार्कर ने बोला है कि एक प्रॉपर ड ठीक है देन उसके बाद एम हिदा दुल्ला ने बोला है प्रिंबल जो है वो की नोट है कांस्टिट्यूशन का इसी तरीके से अलग-अलग लोगों ने प्रिंबल और कॉन्स्टिट्यूशन को कंपेयर करके एक अलग-अलग

नाम दिया है जिसके बाद में जो प्रिंबल जो है वो बहुत ही इंपोर्टेंट हो जाता है हमारे देश के लिए एक तरीके से समरी टाइप है हमारे हमारा प्रिंबल प्रीमल हैज बीन अमेंडेड ओनली वनस सो फार 1976 आज तक प्रिंबल जो है सिर्फ एक ही बार अमेंड हुआ है 42 कांस्टीट्यूशनल अमेंडमेंट एक्ट

जिसमें ये वर्ड डाले गए थे सोशलिस्ट इग टू दिस अमेंडमेंट वास हेल्ड टू बी वैलिड इसके अलावा कोई भी अमेंडमेंट नहीं हुआ है प्रिंबल में

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