हेलो एवरीवन आज हम 11थ चैप्टर करेंगे जिसका नाम है गवर्नमेंट बजट एंड टैक्सेशन तो सबसे पहले इसके टॉपिक्स देख लेते हैं पहला टॉपिक है रोल ऑफ गवर्नमेंट इसमें हम गवर्नमेंट का सोसाइटी में रोल क्या है इसके बारे में जानेंगे सेकंड टॉपिक है एक्सपेंडिचर बाय गवर्नमेंट इस टॉपिक में
हम गवर्नमेंट का एक साल का जितना भी एक्सपेंडिचर है उसे देखेंगे थर्ड टॉपिक है टैक्सेस एंड टाइप ऑफ टैक्सेस फोर्थ टॉपिक है जीएसटी और जीएसटी का आम पब्लिक पर क्या इंपैक्ट होता है फिफ्थ टॉपिक है टैक्स फेयरनेस और इस लेसन का आखरी टॉपिक होगा टैक्स कलेक्शन एंड
इवेज अब इन सारे टॉपिक्स में से हम सबसे पहले वाले टॉपिक पर आते हैं जो कि है रोल ऑफ गवर्नमेंट बजट और टैक्सेशन से पहले गवर्नमेंट का सोसाइटी में रोल क्या है यह जानना सब बहुत ज्यादा जरूरी है गवर्नमेंट वैसे तो एक बहुत ही बड़ा एसेंशियल रोल प्ले करती है सोसाइटी में क्योंकि
गवर्नमेंट हमें बहुत सारे एलिमेंट्स प्रोवाइड करती है जैसे कि ट्रेडिशनल फंक्शन पब्लिक गुड्स एंड सर्विसेस सोशल वेलफेयर गवर्नमेंट हॉस्पिटल्स और स्कूल्स चलाना डिफेंस और लॉ एंड ऑर्डर को मेंटेन करना और कई सारी पब्लिक फैसिलिटी भी गवर्नमेंट प्रोवाइड करती है जैसे कि इलेक्ट्रिसिटी सैनिटाइजेशन और फूड सिक्योरिटी कंट्री के इकोनॉमिक डेवलपमेंट
को भी गवर्नमेंट ही बूस्ट करती है और इन सारी सर्विसेस को पब्लिक तक पहुंचाने के लिए गवर्नमेंट को पैसों की जरूरत होती है अब यह पैसे गवर्नमेंट लाती कहां से है तो गवर्नमेंट जनरल पब्लिक से यह पैसे कलेक्ट करती है इन द फॉर्म ऑफ़ टैक्सेस टैक्सेस
गवर्नमेंट के लिए एक रेवेन्यू की तरह होते हैं और इस रेवेन्यू के बिना गवर्नमेंट का फाइनेंशियल एक्सपेंडिचर नहीं हो सकता कंट्री का फाइनेंशियल ईयर 1स्ट अप्रैल से स्टार्ट होकर 31 मार्च को एंड होता है लेकिन इससे पहले ही गवर्नमेंट अपना बजट जो है उसे डिक्लेयर कर देती है इसे हम अपने
नेक्स्ट टॉपिक में देखेंगे जिसका नाम है एक्सपेंडिचर बाय गवर्नमेंट इस इस टॉपिक में हम इंडियन गवर्नमेंट का 2011 और 12 का एक्सपेंडिचर देखेंगे इस साल का पूरा बजट 23 लाख करोड़ था जिसमें से 3 पर फुड को दिया गया और 12 पर एजुकेशन आर्ट्स एंड कल्चर को व्हिच
इंक्लूड्स कंस्ट्रक्शन ऑफ न्यू कॉलेजेस और इन्वेस्टमेंट्स 4 पर हेल्थ एंड सैनिटाइजेशन को दिया गया 7 पर रूरल एंड अर्बन एरियाज डेवलपमेंट 6 पर इरिगेशन 2 पर फर्टिलाइजर्स को दिए जाने वाली सब्सिडीज 6 पर रेल रेवे ट्रांसपोर्टेशन एंड कम्युनिकेशन डिफेंस को 7 पर दिया गया एडमिनिस्ट्रेशन को 8 पर और पेंशंस को 7 पर
इस पूरे बजट का सबसे बड़ा हिस्सा यानी कि 21 पर अदर्स यानी कि गवर्नमेंट की फ्री स्कीम्स और कोई इमरजेंसीज आने पर यह पैसा यूज किया जाएगा अगर आप ठीक से देखें तो 17 पर इंटरेस्ट भी वहां पर आपको दिखेगा अब यह इंटरेस्ट किस चीज का है जैसे कि इंडिया एक
डेवलप्ड कंट्री नहीं है तो अपने एक्सपेंसेस को मीट करने के लिए लिए इंडिया को हर साल कुछ मनी बोरो करना पड़ता है और पिछले पैसों का इंटरेस्ट भी देना पड़ता है तो यह उन्हीं पैसों का इंटरेस्ट है हमारा अगला टॉपिक है टैक्सेस टैक्सेस गवर्नमेंट रेवेन्यू का मेन सोर्स होता है
क्योंकि टैक्सेस से आने वाला पैसा गवर्नमेंट के लिए इनकम की तरह होता है आपने पहले भी कई सारे टैक्सेस के नाम सुने होंगे जैसे कि प्रॉपर्टी टैक्स गोल्ड टैक्स गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स लेकिन टैक्सेस ब्रॉडली सिर्फ दो ही कैटेगरी में डिवाइडेड होते हैं जो कि है डायरेक्ट टैक्सेस और इनडायरेक्ट टैक्सेस सबसे पहले
हम डायरेक्ट टैक्सेस की बात करते हैं डायरेक्ट टैक्सेस वो टैक्सेस होते हैं जो कि डायरेक्टली किसी इंडिविजुअल पर चार्ज किए जाते हैं यह टैक्सेस इंडिविजुअल को डायरेक्टली गवर्नमेंट को ही पे करना होता है यह टैक्सेस या तो अ इंडिविजुअल की इनकम पर पड़ते हैं या फिर उनकी कंपनी से बनाए
गए प्रॉफिट्स पर एग्जांपल के लिए इनकम टैक्स और कॉर्पोरेट टैक्स जैसे कि अगर आपकी एक एक कंपनी है और कंपनी की एक फैक्ट्री है जहां पर गुड्स मैन्युफैक्चर होते हैं गुड्स सेल करने के बाद जितना भी प्रॉफिट चाहता है उसमें से मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट और एक्सपेंसेस निकालने के बाद जितना भी प्रॉफिट बचता है
उस प्रॉफिट पर एक टैक्स दिया जाता है और इस टैक्स को कॉर्पोरेट टैक्स कहते हैं इनकम टैक्स जो होता है इनकम एक पर्टिकुलर पर्सन की इनकम पर चार्ज किया जाता है जितनी आपकी इनकम है उस परसेंटेज के हिसाब से आपको यह टैक्स पे करना पड़ता है अब
देखते हैं कि इनडायरेक्ट टैक्सेस क्या है इनडायरेक्ट टैक्सेस वो होते हैं जो कि आपको इनडायरेक्टली गवर्नमेंट को पे करना पड़ता है यह टैक्सेस दोनों गुड्स और सर्विसेस पर चार्ज किए जाते हैं जैसे कि अगर आप कोई भी गूड खरीदते हैं तो उसकी एमआरपी के पास आपने इंक्लूसिव फॉर ऑल
टैक्सेस तो पढ़ा ही होगा इसका मतलब यह होता है कि उस पर्टिकुलर गुड का जितना भी मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट था प्लस उस पर जितना भी गवर्नमेंट ने अपना टैक्स लगाया है इन सबको मिलाकर उस पर्टिकुलर गुड की एमआरपी यानी कि उस प्राइस पर उसे बेचा जाता है फॉर एग्जांपल अगर एक टीवी का
मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट 10000 हुआ तो उस हिसाब से गवर्नमेंट इस पर अपना 1800 का टैक्स चार्ज करती है और यही सेम टीवी कस्टमर को मार्केट में 11800 में बेचा जाएगा कस्टमर एक टैक्स कस्टमर तो पे कर देता है लेकिन डायरेक्टली नहीं इनडायरेक्टली इसी के साथ आज की वीडियो
खत्म होती है अगले टॉपिक्स हम नेक्स्ट वीडियो में पढ़ेंगे जब तक के लिए बाय
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