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भारत का विचार श्रृंखलाः 40.Art 51A(b)-Cherish & follow noble ideals of our freedom struggle

adminBy adminFebruary 12, 2024No Comments13 Mins Read
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मित्रों नमस्कार भारत का विचार श्रृंखला के इस कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है मैं हूं व्यास जी कार्यक्रम प्रारंभ करने के पहले छोटी सी अपील अगर अभी तक आपने मेरे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया हो तो कृपया सब्सक्राइब करें और यदि सब्सक्राइब

पहले से किया हो या अभी कर रहे हो तो बेल आइकन का बटन जरूर दबा दे ताकि जब भी मैं कोई वीडियो अपलोड करूं आप तक नोटिफिकेशन पहुंच जाए आज हम लोग मूलभूत कर्तव्यों से संबंधित एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण कर्तव्य की च करेंगे जो अनुच्छेद 51 ए स्माल बी में दिया हुआ

है जानते हैं कि मूलभूत अधिकार हमारे पास है न हमारे पास कुल 11 मूलभूत कर्तव्य भी है जिनम से दो की मैं पहले चर्चा कर चुका हूं और यह चर्चा मुझे लगता है कि आज के परिवेश में बहुत ही मौजू मुझे लगता है आज का परिवेश मैं कहता हूं तो क्या है परिवेश

आज का जिस तरह के देश और जिस तरह के समाज के निर्माण के लिए धान में प्रावधान किए गए हैं हमारे संविधान निर्माताओं ने भारत की जनता की ओर से सोचा था जिस तरह के डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट समाजवादी न्यायपूर्ण स्वतंत्रता वाले बराबरी वाले और बंधुत्व वाले समाज की कल्पना किया था क्या वह सब

हम देख पा रहे हैं धार्मिक नफरत और अंधता के इस माहौल में जहां भाई और भाई का दुश्मन दिखलाई पड़ते हैं जाति के आधार पर धर्म के आधार पर जिस कर्तव्य की मैं चर्चा करने जा रहा हूं बहुत ही महत्वपूर्ण कर्तव्य है 51 ए का का

जो उपखंड भी है व क्या कहता है वह कहता है कि भारत के हर नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह स्वतंत्रता आंदोलन के जो महान आदर्श है उन आदर्शों का संयोजन कर उनको सजो उनका पालन करे मैं अंग्रेजी में कहू शल बी ड्यूटी ऑफ इडियन सिटीजन ू चेरिश एंड

एंड फॉलो द नोबल आइडियल ऑफ द फ्रीडम स्ट्रगल अब हम समझने की कोशिश करें कि जिन महान आदर्शों की बात की जा रही है वे आदर्श है क्या और य इसलिए भी मौजी हो जाता है कि जो लोग 1947 के बाद पैदा हुए हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई नहीं

देखी किताबों में पढ़ा है और य इतिहास को बदलने की कोशिश की जा रही है और यदि व वह कामयाबी लोगों को जो बदलना चाहते हैं मिल गई तो निश्चित तौर से उन्हें व इतिहास का पता ही नहीं चलेगा महान आदर्शों का पता ही नहीं चलेगा जिससे हमारा स्वतंत्रता आंदोलन अनुप्राणित हुआ

था इसलिए बहुत महत्त्वपूर्ण है एक नई पीढ़ी पैदा हुई है 2000 के बाद से जिसको न्यू मालेयम की पीढ़ी कहते हैं जो पूरी तरह से अपने ज्ञान के लिए वाटस पर निर्भर है मीडिया के बड़े हिस्से पर निर्भर है जिसको हम टेलीविजन मीडिया मीडिया कहते हैं

प्रिंट मीडिया भी हम कुछ हिस्सों में है अखबारों के माध्यम से मैगनों के माध्यम से लेकिन अधिकांश उसमें से भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के उन महान उद्देश्यों की चर्चा शायद ही करते हैं जिससे हमारा हमारा पूरा का पूरा स्वतंत्रता आंदोलन अनुप्राणित हुआ था इसलिए हमारे नई पीढ़ी

को शायद इन सबकी कोई बहुत जानकारी भी नहीं होगी और कई तरह के की संस्कृति उनको एक तरह से मैं कहूं कि प्रभावित कर रही हैं इसलिए यह कर्तव्य बहुत ही महत्त्वपूर्ण हो जाता है पूरे देश के लिए और खास करके नई पीढ़ी के लिए जब मैं आपसे चर्चा कर रहा हूं मुझे

1857 का प्रथम विद्रोह तो नहीं कहूंगा स्वतंत्रता उसे संग्राम कहा जाता है भारत की आजादी का पहला संग्राम कहा जाता है वह मुझे याद आता है तात्या टोपे याद आते हैं लक्ष्मी बाई याद आती है बेगम हजरत महल याद आते हैं और बहादुर शाह जफर याद आते हैं और

न जाने कितने नाम नामी और अनामी बिहार में बाबू कु सिंह नजर आते हैं और कितने अनाम शहीद याद आते हैं जिन्होंने मिल कर के चाहे हिंदू मुसलमान है उन्होंने मिलक के आजादी की जंग लड़ी थी यह अलग बात है कि आजादी की उस जंग में हमारा देश पराजित हो

गया था और हमें फिर लगभग 90 सालों तक इंतजार करना पड़ा था पलासी की लड़ाई के बाद हम 100 साल बाद स्वतंत्रता का पहला संग्राम लड़ रहे थे मंगल पांडे के रूप में रणभेरी बजी थी फौजियों के रूप में रणभेरी बजी थी उसके अपने कारण थे लेकिन य विद्रोह

यही आंदोलन यही लड़ाई पूरे देश में फैल गई थी क्यों ड़ थे मुसलमान एक साथ यह बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है और उसके बाद अंग्रेज सरकार ने क्या किया था यह भी बहुत महत्वपूर्ण होता है फूट डालो की नीति का पालन किया और हिंदू मुसलमानों के बीच ऐसी

खाई पैदा कर दी जिस खाई को भर पाना एक तरीके से हम भारतीयों के लिए असंभव सा हो गया फाल्ट लाइन क्रिएट कर दिया अंग्रेजों ने मिलाकर के और उसके बाद स्थितियां बड़ी बदतर ई लेकिन इस समय मैं याद करता हूं पंडित राम प्रसाद बिस्मिल अशफाक उल्ला खान रोशन सिंह राजेंद्र

लाहिरी षड्यंत्र के वे आरोपी जिन्ह फांसी की सजा दी गई और बहुत सारे लोगों को आजीवन करवास की सजा दी गई जेलों की लंबी यातनाएं भुगतनी पड़ी मैं हिंदुस्तान सोश रिपब्लिकन आर्मी एसोसिएशन के चंद्रशेखर आजाद को याद करना चाहता हूं भगत सिंह को याद करना चाहता हूं राजगुरु को याद करना चाहता हूं

सुखदेव को याद करना चाहता हूं और उनके बहुत सारे जो शहीद हुए और जो जेलों की यातना सहे उन सभी को मैं याद करना चाहता हूं बहुतों के नाम ले पाना इस छोटे समय में में आसान नहीं है संभव भी नहीं है मुझे गांधी जी याद आते हैं मुझे लोकमान्य

तिलक की याद आती है मुझे गोखले भी याद आते हैं मुझे बंग भंग आंदोलन में जो शहीद हुए उनकी याद आती है अनुशीलन समिति के बागा जती याद आते हैं तीन दास भी याद आते हैं जिन्होंने लंबे अनुन के बाद जेल में प्राण त्याग दिया था नेहरू याद आते हैं उनका सोश

याद आता है भगत सिंह का सोलिम याद आता है मुझे मौलाना भी याद आते हैं जो बंटवारे के बावजूद इस देश में रहना कबूल किया और वही नहीं उनके जैसे तमाम राष्ट्रवादी मुसलमानों ने इस देश को अपने मादरे वतन मानते हुए रहना कबूल किया मुझे सरदार पटेल

की याद आती है मुझे राजेंद्र बाब की याद आती है और न जाने कितने स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानियों की याद आती है अंबेदकर की याद आती है और तब जब हम स्वतंत्रता आंदोलन को प्रेरित करने वाले महान आदर्शों के बारे में सोचते हैं तो हमें कई तरह के आदर्श दिखलाई पड़ते हैं

एक लंबी फेहरिस्त बन जाएगी कुछ आदर्श हमारे आप सबके लिए बड़े महत्त्वपूर्ण है व मैं रखना चाहता हूं व उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन था वह देशभक्ति का आंदोलन था और देश का मतलब यह नहीं था कि केवल कुछ वर्गों के लिए हम देश की सीमा को सीमित कर दे वो

केवल हमारे भौगोलिक एकता अखंडता के लिए नहीं था उ देश बसने वाले हर व्यक्ति के हर तरह के लोगों के स्त्री पुरुष हर जाति हर धर्म के लोगों के एकता और अखंडता का संकल्प था वो देशभक्ति का मतलब यह उस आंदोलन से उस उन महान आदर्शों में हमें

दिखलाई पड़ता वो समानता के लिए था ऐसे समाज को बनाने के लिए जहां समानता हो जहां मानव द्वारा मानव का शोषण नहीं हो मानव श्रम की प्रतिष्ठा हो मानवीय गरिमा की प्रतिष्ठा हो इन शहीदों ने ऐसे ही जान नहीं दिया फांसी के फंदे पर जो झूलने जाते

थे अगर हिंदू थे उनके हाथ में गीता रहती थी अगर वो मुसलमान थे तो उनके पास कुरान शरीफ रहता था एक के जी जवा पे भगवान श्री कृष्ण गजते थे भगवान राम गजते थे और दूसरे जीवा पर अल्लाह का नारा होता था अकला खान को जब फांसी दी गई और ये

पूछा गया कि तुम्हारी अंतिम इच्छा क्या है उसने कहा कि मेरी अंतिम इच्छा यही है मैं कहा गया क्या तुम कोई खास चीज खाना चाहते हो तुम किसी से मिलना चाहते हो अशफाक उल्ला खान महान शहीद ने यह कहा कि मैं किसी से मिलना चाहता हूं ना मैं किसी से

खाना चाहता हूं अगर पुनर्जन्म होता हो क्यों हिंदू मानते पुनर्जन्म होता है तो मैं मेरी अंतिम इच्छा यही है कि मेरा जन्म इसी मादर वतन हिंदुस्तान की मिट्टी में हो यह आदर्श महान आदर्श थे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का नाम आप में से जिन्होंने नहीं सुना होगा उन्हें बता दूं कि

यह बिस्मिल के समय अशफाक उल्ला खान के समय रोशन सिंह के समय राजें लाड़ के समय यह एसोसिएशन बना था जो बाद में आर्मी भी कहलाया और इसके कमांडर हुए लोगों के शहीद हो जाने के बाद चंद्रशेखर आजाद उ बलराज और भगत सिंह उसी एसोसिएशन की हिस्से थे

सुखदेव राजगुरु सब उन्हीं के साथ थे भगत सिंह से किसी ने पूछा कि आप कैसा देश चाहते हो अंग्रेज चले जाएंगे लेन क्या भारतीय अपना शासन चला पाएंगे क्या कहा था उन्होंने कहा था मैं ऐसा देश चाहता हूं ज हर आदमी को इज्जत की जिंदगी और मेहनत की रोटी मिले

अ श्रम की गरिमा मनुष्य की गरिमा बराबरी इसी को उन्होंने कहा मैं इसे समाजवाद कहता हूं यदि आप भगत सिंह के राइटिंग को पढ़ेंगे आपको लगेगा कि अरे साहब इतने कम उम्र का 1907 में पैदा हुआ नौजवान 23 मार्च 1931 को शहीद कर दिया जाता है मुश्किल से 2 24

साल की उम्र में कितने बड़े इंटेलेक्चुअल थे कितने बड़े बुद्धिजीवी थे कितने बड़े देशभक्त थे समाजवाद के बारे में कितनी जबरदस्त समझ थी याद करें सोब रूस की क्रांति हुई थी 1917 में क्रांति हो चुकी थी लेनिन आ चुके थे इसलिए दुनिया भर के नौजवानों के ऊपर उसका असर था उस क्रांति

का असर था उसके आदर्शों का असर था और भगत सिंह के ऊपर उसका असर था नेहरू के ऊपर असर था समाजवाद शब्द हमारे संविधान में ऐसे ही नहीं आया व आर्थिक न्याय सामाजिक न्याय राजनीतिक न्याय परिभाषा जस्टिस की पूरी की पूरी परिभाषा बाद में संविधान में आई ऐसे

ही नहीं आई गांधी जी ने सत्य अहिंसा की बात तिलक ने स्वराज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है लाला राजपत राय लाठियों से पीट करके मार दिए जाते हैं और उनके लिए भगत सिंह जैसे लोग सांडर्स का वध करते हैं हालाकि कहते स्कट वध करना था स्कट व एसपी था लेकिन

गलती से सांडर्स को मार दिया गया जो असिस्टेंट एसपी था प्रोवेशन प आया हु था लेकिन यह सारे के सारे अंग्रेज उस उपनिवेशवाद के प्रतीक थे और लाला लाजपत राय के ऊपर जो लाठी पड़ी थी उस लाठी का जवाब था और लाला लाजपत राय किस चीज के

विरोध में लाठी खा रहे थे रोलेट एक्ट के विरोध में लाठी खा रहे थे काले कानून के विरोध में इसलिए आजादी की लड़ाई का महान आदर्श य भी था कि जो कानून बंगे यह कानून भारत की आम जनता की बेहतरी के लिए होने चाहिए किसी वर्ग विशेष के लिए किसी

व्यक्ति विशेष के लिए फायदा पहुंचाने वाले नहीं होना चाहिए व जनता पर शोषण दमन के हथियार के रूप में नहीं होने चाहिए क्या ऐसा हमने आजादी के बाद होने दिया क्या आज की तारीख में भी हम ऐसा होने दे रहे हैं य सोचने का विषय है हम सभी के सामने सोचना

का विषय है गांधी जी ने सत्य हिंसा के हथियार की बात की और देश को अनुप्राणित कर दिया और देश को बराबरी के रास्ते पर अछूत धार के बारे में छुआछूत को मिटाने के बारे में और बाबा साहेब अंबेडकर आए जिस माहौल से आए जिस परिवेश से आए उस

परिवेश में कलियां कुमला जाती हैं फूल नहीं बनती ये आजादी के महान आदर्श थे जिन्होंने कहा कि छुआछूत नहीं होना चाहिए जाति व्यवस्था का अंत होना चाहिए जाति उत्पीड़न की समाप्ति होनी चाहिए और इतनी जल्दी जाति तो जाति नहीं लेकिन जाति के बारे में जो वर्चस्व वादी सोच है उस सोच

पर हमला जो मनुवादी सोच है उस सोच पर हमला य मानना के जो उच्च वर्ण कथित उ वर्ण के लोग सबसे श्रेष्ठ होते हैं उस पर हमला मनुष्य बराबर होता है बराबरी की बात है और फ्रांस की क्रांति हो चुकी थी वो बराबरी की बात य बराबरी की बात और सोट रूस की

क्रांति के बाद हर व्यक्ति बराबर था जमीदारी एलेशन क्यों हुआ इसीलिए हुआ कि वो हमारे आजादी के आंदोलन का महान उद्देश्य था मनुष्य द्वारा मनुष्य का शोषण नहीं हो जमींदारी व्यवस्था मनुष्य द्वारा मनुष्य के शोषण का बहुत ही गृहित उदाहरण दिया जाता है मित्रों इसलिए स्त्री स्त्री और पुरुष की

समानता जातियों की समानता मनुष्य मनुष्य के बीच की समानता ये बहुत सारे ऐसे आदर्श हैं हालांकि आदर्श तो बहुत ज्यादा है लेकिन ये जो बहुत महत्त्वपूर्ण आदर्श है उनमें से बहुतों ने हमारे संविधान में स्थान पाया हिंदू मुस्लिम एकता सभी धर्मों का धार्मिक समभाव गांधी जी हरिजन में

लिखते हैं जो मैगजीन है कि मेरा धर्म मेरा अपना मामला है राज्य कोसे कोई संबंध नहीं होना चाहिए राज्य का कोई धर्म नहीं होगा राज्य का धर्म होगा पूरे देश की सेवा करना पूरे देश के हर नागरिक के सुख सुविधा का ध्यान रखना देखना की शांति बनी रहे

सौहार्द बना रहे यह नहीं कि राज्य भी अपना धर्म किताब में भले नहीं लिखा हो लेकिन व प्रन रूप से राज्य चलाने वाले लोग किसी धर्म विशेष के बारे में आग्रह पाए जाए मनुष्य का व्यक्तिगत मामला है लेकिन अगर राज्य पर छा जाएगा याद कीजिए पोप के

समय और और इस्लाम इस्लामी राष्ट्र जो बने हैं शरीयत से चलते हैं क्या उनकी दशा दुर्दशा है और पोप के समय तो जो इवेशन होते थे गैलीलियो तक को मार दिया गया क्योंकि वह ऐसी बात प्रूफ कर रहे थे जो बाइबल में नहीं थी इसलिए धार्मिक ग्रंथों

का परायण करना व्यक्तिगत मामला है व राज्य में दखल नहीं देना चाहिए प्लेग हुआ यूरोप में नेसा का जन्म हुआ और लोगों ने ईश्वर की बजाय अपने पर भरोसा करना शुरू किया यह हमारे जो महान लक्ष्य हैं मित्रों आज की तारीख में उन लक्ष्यों को वास्तव में सजने

की आवश्यकता है और आप में से जो लोग परिवर्तन कामी शक्तियों में विश्वास करते हैं जो समाजिक सामाजिक बदलाव के लिए लड़ते हैं सोचते हैं उनका दायित्व बहुत ज्यादा बढ़ जाता है क्योंकि अभी मैं देख रहा हूं किस तरह की शक्तियां कमजोर हो रही है जो स्वतंत्रता आंदोलन के महान आदर्श है उसे

हम भूलते जा रहे हैं सजने की बात तो दूर की बात है क्या आप नहीं समझते कि ऐसा हो रहा है और आप नहीं समझते कि हमें उन महान आदर्शों को सजना चाहिए अपने मानते महान आदर्शों का हमें पालन करना चाहिए क्योंकि हम पालन कर सकते हैं लोगों

ने खून बहाए हैं अपनी अपने प्राणों का उत्सर्ग किया है लोगों ने जन की लंबी तनाए सही है इसलिए मित्रों इस देश को जिन महान उद्देश्यों के कारण हमारे शहीदों ने हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने आजादी दिलाई हम उन्ह सलाम करते हुए यह प्रण के संविधान में अगर नहीं

भी हो तब भी हम उन महान आदर्शों का आदर करेंगे उनका उनको सजो एंगे उनका पालन करेंगे इस शब्दों के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद मैं आशा करता हूं कि आपको मेरी बात पसंद आई होगी इसलिए लाइक करें शेयर करें और अपने ग्रुप में भी इसको भेजें बहुत-बहुत धन्यवाद नमस्कार

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