[संगीत] सलाम वालेकुम खलदून टीवी पर एक बार फिर खुशामदीद नाजरीन आज की वीडियो में हम मुकाते मदीना के हवाले से आपके साथ मालूमात शेयर करेंगे एक ऐसा वाकया जो सदियां गुजर जाने के बावजूद भी उसी तरह जिंदा और जावेद है और ऐसी इसार कुर्बानी की दास्ताने बहुत कम मिलती हैं हिजरत
मदीना के बाद चूंकि मजरीन इंतहा बेसर समानी की हालत में बिल्कुल हाथ अपने अलो हयाल को छोड़कर मदीना आए थे इसलिए परदेश में मुफलिसी के साथ वैश तो बेगान कीी और अपने अलो अयाल की जुदाई का सदमा महसूस करते थे इसमें शक नहीं कि अंसार ने उन मजरीन की मेहमान नवाजी और
दिलज में कोई कसर नहीं उठा रखी थी लेकिन माजन देर तक दूसरों के सारे जिंदगी बसर करना पसंद नहीं करते थे क्योंकि वह लोग हमेशा से अपने दस्तो बाजों की कमाई खाने के खगर थे इसलिए जरूरत थी कि मजरीन की परेशानी को दूर किया जाए और उन के लिए
मुस्तकिल जरिया माश महिया करने के लिए कोई इंजम किया जाए इस मकसद के लिए हजूर सल्लल्लाहु अल वसल्लम ने ख्याल फरमाया कि अंसार और मजरीन में रिश्ता अखू कायम करके उनको बाईबाई बना दिया जाए ताकि मजरीन के दिलों से अपनी तन्हाई और बेकसी का एहसास
दूर हो जाए और एक दूसरे के मददगार बन जाने से मजरीन के जरिए माश का मसला भी हल हो जाए चुनांचे मस्जिद नबी की तामीर के बाद एक दिन हजूर सल्लल्लाहु अल वसल्लम ने हजरत अनस बिन मालक रजि अल्लाह ताला अन्हो के मकान में अंसार मजरीन को जमा फरमाया उस
वक्त तक मजरीन की तादाद 45 या 50 के करीब थी हजूर सल्लल्लाहु अल वसल्लम ने अंसार को मुखातिब करके फरमाया यह मजरीन तुम्हारे भाई हैं फिर मजरीन और अंसार में से दो-दो शख्स को बुलाकर फरमाते यह और तुम भाई भाई हो हजूर स सलम के इरशाद फरमाते ही यह
रिश्ता खूत बिल्कुल हकीकी भाई जैसा व बन गया चुनांचे अंसार ने मजरीन को साथ ले जाकर अपने घर की एक-एक चीज सामने रख दी और कह दिया कि आप हमारे भाई हैं इसलिए इन सब सामानों में से आधा आपका और आधा हमारा है हद यह हुई कि हजरत साद बिन रबी अंसारी जो
हजरत अब्दुल रहमान बिन ओफ के भाई करार पाए उनकी दो बीवियां थी हजरत साद बिन रबी ने हजरत अब्दुल रहमान बिन ओफ से कहा कि मेरी एक बीवी जिसे आप पसंद करें मैं उसको तलाक दे दूं और आप उससे निकाह कर ले इसमें शक नहीं कि अंसार का यह सार ऐसा बेमिस शाहकार
है कि अवाम आलम की तारीख में इसकी मिसाल मुश्किल से ही मिलेगी मगर मजरीन ने क्या तर्ज अमल इख्तियार किया यह भी एक काबिले तकलीद तारीखी कारनामा है साद बिन अबी अंसारी की इस मुखला साना पेशकश को सुनकर अब्दुल रहमान बिन औफ ने शुक्रिया के साथ
यह कहा कि अल्लाह ताला यह सब मालो मता और अहलो अयाल आपको मुबारक फरमाए मुझे तो आप सिर्फ बाजार का रास्ता बता दें उन्होंने मदीना के मशहूर बाजार केनका का रास्ता बताया अब्दुल रहमान बिन औफ बाजार गए और कुछ घी और कुछ पनीर खरीद कर शाम तक बेचते
रहे इस तरह रोजाना वह बाजार जाते रहे और थोड़े ही अरसे में वह काफी मालदार हो गए और उनके पास इतना सरमाया जमा हो गया कि उन्होंने शादी करके अपना घर बसा लिया जब यह बारगाह रिसालत में हाजिर हुए तो हुजूर ने दरयाफ्त फरमाया कि तुमने बीवी को कितना
मेर दिया अर्ज किया पाच दिर बराबर सोना इरशाद फरमाया अल्लाह तुम्हें बरकत अता फरमाए तुम दावत वलीमा करो अगरचे एक बकरी ही क्यों ना हो रफ्ता रफ्ता हजत अब्दुल रहमान बिन औफ की तिजारत में इतनी खैर बरकत और तरक्की हुई कि खुद उनका कोल है कि मैं
मट्टी को छू देता हूं तो सोना बन जाती है मनुकूल है कि उनका सामान्य तिजारत 700 पर लद कर आता था और जिस दिन मदीना में उनका तिजारी सामान पहुंचता था तो तमाम शहर में धूम मच जाती थी अब्दुल रहमान बिन औफ की तरह दूसरे मजरीन ने भी दुकानें खोल ली
हजरत अबू बकर सिद्दीक कपड़े की तिजारत करते थे हजरत उस्मान केनका के बाजार में खजूरों की तिजारत करने लगे हजरत उमर भी तिजारत में मशगूल हो गए दूसरे मजरीन ने भी छोटी मोटी तिजारत शुरू कर दी गलत बावजूद यह के मजरीन के लिए अंसार का घर मुस्तकिल
मेहमान खाना था मगर मजरीन ज्यादा दिनों तक अंसार पर बोझ नहीं बने बल्कि अपनी मेहनत और बेपना कोशिशों से बहुत जल्द अपने पांव खड़े हो गए जब तमाम अंसार और मजरीन का भाईचारा हो गया तो हजरत अली ने दरबार रिसालत में अर्ज किया या रसूल अल्लाह आपने
सहाबा को एक दूसरे का भाई बना दिया लेकिन आपने मुझे किसी का भाई नहीं बनाया आखिर मेरा भाई कौन है तो हुजूर स वसल्लम ने फरमाया तुम दुनिया और आखिरत में मेरे भाई हो नाजरीन यह थी मुआका के हवाले से एक मुख्तसर सी वीडियो मजीद इस्लामी तारीखी
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